Sharvari - A Love Story Part 1
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बड़ी ताज्जुब की बात है की हमारी निजी जिंदगी में हम जो भी फैसला ले उससे,
" न तो रिश्तेदारों के स्वास्थ्य में कोई परिवर्तन होने वाला है न तो उनकी जागीर में ! फिर भी वह लोग अपने फैसले बिना निमंत्रण के सुनाने क्यों आ जाते है? "
" ये थोड़ी कह रहा हु में। में सिर्फ इतना कह रहा हु की कृष्ण को दिल से पूजती हो लेकिन अगर कोई प्रेम की बात करे तो तुम ठुकरा देती हो। ऐसा क्यों... ? "
" because today love is like taking a chance on someone. If bonding goes right then live whole life together otherwise change the way... and for me, love is like...leave it, sir, I have lots of work pending let me do it. "
(and the discussion stops here.)
शर्वरी ने हाल ही में अपनी 12th exam अच्छे नबरों से पास करी और आगे पढ़ने के बारे में सोचने के बजाये उसने कुछ खुदका करने की ठान ली थी। इसीलिए उसे पता था की बाहरी दुनिया की भी जानकारी लेनी होगी और उसने वहाँ काम करना शरू किया जहाँ से उसने १०वी और १२वी की कोचिंग ली। कोचिंग क्लास बहुत ही जिम्मेदारी से शर्वरी ने संभाल लिया और उसके आलावा भी डिज़ाइन के ट्रेनिंग लेकर उस में आगे बढ़ने की सारी बाते उसने अपने दिमाग में सोच रखी थी। कोचिंग में काम करते करते उसमे कई management के गुण खिले। कभी कबार शर्वरी और उसके टीचर के बिच किसी किसी बात पर चर्चा या तो गंभीर चर्चा हो जाया करती थी। उसकी वजह एक ही थी की शर्वरी को अपने विचारो के मुताबिक जीने की आदत थी वह बुरी हो या अच्छी लेकिन उसने आज तक किसी और पर अपने विचार थोपने की कोशिश नहीं की न ही उसने किसीके विचार बदलने की कोशिश की। वह अपने काम से काम रखना पसंद करती थी। किसी और की निजी ज़िंदगी में क्या चल रहा है उससे शर्वरी को कोई मतलब नहीं लेकिन... लेकिन तब तक अगर कोई उसके विचारो या निजी फेसलो में अपनी टांग न अड़ाये। शर्वरी खुले विचारो वाली थी लेकिन अपनी कुछ मर्यादा भी वह बखूबी जानती थी और यही बात उसे औरो से अलग साबित करती थी... खैर तारीफ के लिए वक्त ही नहीं है हमारे पास।
हम सीधे शर्वरी की कहानी के २ महीने बाद जाते है क्योकि बदलाव वक्त लगाता है और हमारे पास वो बहुत कम है। शर्वरी अपने जीवन के शरुआती पायदान पर थी लेकिन उसकी सोच बहुत आगे तक का देख सकती थी... सोचिये मत कोई जादू नहीं था लेकिन उसकी बुरी आदत की वजह से वह परेशान रहती थी उसके बारे में आगे बताउंगी जब वक्त आएगा।
आज शर्वरी सुबह ६ बजे अपने कोचिंग क्लास (यूँ कहे तो अपने ऑफिस) पहोच गई कारण सिर्फ इतना की उसे library की सफाई करने की इच्छा हुई थी। Students के आने से पहले उसे यह काम complete करना था। निर्धारित समय पर काम खत्म कर के वह अपने रोजाना कामो में लग गई। सर के आने तक में उसने पूरा क्लास साफ़ कर दिया और यह देख कर सर बोल उठे इतनी बुरी आदत इस ऑफिस को मत लगाओ शर्वरी...
शर्वरी ने हस कर जवाब दिया में अपनी अच्छी आदत भला क्यों छोड़ू ? और सब अपने काम में लग गए। ऐसे ही दिन गुजरते गए और शर्वरी को ४ महीने हो गए काम करते हुए। अपनी डिज़ाइन की पढाई को वह बड़ी तेजी से आगे बढ़ा रही थी। ऐसे ही नौराता आया क्लास में हर साल की तरह इस साल भी एक दिन के लिए बच्चो को गरबा खेलने देने की वयवस्था संचालको ने कर दी थी। शर्वरी भी अंत में जो students बचे थे उन्हें लेके मैदान की और चल पड़ी। दिन अच्छा गुजरा। दूसरे दिन सर ने आके यह बताया की शर्वरी तुम्हे यह जॉब छोड़ देनी चाहिए। शर्वरी ने कहा क्यों काम में कोई भूल हो गई। सर तुरंत ही कह उठे बिलकुल भी ही लेकिन काम के अति बोज की वजह से तुम बहोत कमजोर होती जा रही हो (वजह यह थी की धीरे धीरे शर्वरी का शरीर दुबला होता जा रहा था और गरबा के दिन दूसरी लड़कियों के सामने शर्वरी बिलकुल एक तिनके के भाँति दिख रही थी। इसमें कोई शंका नहीं है की शर्वरी की सुंदरता और उसका स्वाभिमानी चहेरा-चाल भीड़ में भी निखर आता था। इसीलिए कई लोगो के आकर्षण की वजह रहती थी शर्वरी)
शर्वरी सर की इस बात से विचार में पद गई घर जाकर उसने अपनी माँ से बात की तो माँ ने भी यही कहा की तुम कमजोर होती जा रही हो लेकिन उसे काम करना न करना यह उसका फैसला था। वह सोच में पड गई क्योंकि अभी उसकी थोड़ी पढाई बाकि थी जिसके आधार पर वह कोई और काम ढूंढ सके। इसी विचार में उसने एक और महीना वहा निकल दिया। इस बिच क्लास के संचालको में अनबन होने लगी जिसका अंदाज़ा शर्वरी को होने लगा और उसने सर को चेतवनी दी। जो की शर्वरी ने चेतवनी दी इसलिए सर ने उसकी बात को गौर से लिया उन्हें भी कही न कही यह आभास हुआ और उन्होने फिरसे कहा तुम यहाँ से चली जाओ। लेकिन शर्वरी ने थोड़ा समय मांगा इस बिच अनबन ज्यादा बढ़ी और शर्वरी को एक बार कहा गया की तुम अपनी होदे मुताबिक की सीट बैठो यह सीट संचालको के लिए है (शर्वरी की आदत हमेशा मुख्य सीट पर बैठने की थी और कोई मना भी नहीं कर सकता था। उसके काम की वजह से।) संचालक मित्र की यह बात सर को पसंद नहीं आयी और उन्होंने थोड़ा सा सुना दिया आगे बोलने से शर्वरी ने रोक दिया। वजह यह थी की शर्वरी के उसूल के मुताबिक यह सही था। वह सामने बैठने लगी अपनी उचित जगह पर। यह तीसरी बार हुआ की शर्वरी को यहाँ से जाने को कहा गया। अब शर्वरी की सोच ने उससे कहा की यहाँ रहना उचित नहीं होगा और उसने तीसरे दिन इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे की वजह से कईओ ने कहा की उसे अपना अपमान सहन नहीं हुआ... लेकिन शर्वरी ने किसीको जवाब नहीं दिया और यह बात सर को चुभने लगी उन्होंने अकेले में उससे पूछा की उसने पलट कर जवाब क्यों नहीं दिया तब उसने कहा कुछ न कहना भी जवाब ही है और आगे जवाब देने की जरूरत आपको पड़ेगी... यह बात सर को गहरी सोच में डाल गई की ऐसा क्यों होगा। उन्होंने पूछने की कई बार कोशिश की लेकिन शर्वरी का जवाब नहीं मिला। (सर शर्वरी की उस बुरी आदत से वाकिफ थे। चलिए अब बता देती हु कोनसी बुरी आदत। शर्वरी को भविष्य का अंदाज़ा सामनेवाले की बातो से लगाने की बुरी आदत थी और उससे बुरा यह था की उसका हर अंदाज़ा आज तक गलत साबित नहीं हुआ और यह शर्वरी ने सिर्फ कुछ लोगो को बताई थी लेकिन उनमे से इसे सच मानने वाले सिर्फ सर थे।) शर्वरी को अब सिर्फ 15 दिन बाकि थे और उसने जो अंदाज़ा लगाया वह सही साबित हुआ। फिर से एक दिन संचालक मित्र ने सर के भाई को बुरा भला कहा और सर ने कोई पलटकर जवाब नहीं दिया। यह बात शर्वरी को पता चलने में देर लग गई जब पता चला,
उसने से को कहा " मेने आपसे कहा था की जवाब आपको देना होगा फिर भी अपने क्यों नहीं दिया?"
सर ने कहा " ऐसे में उन्हें जवाब नहीं दे सकता "
" किस ख़ुशी में नहीं दे सकते ?"
" क्योंकि गलती मेरी थी मुझे अपने भाई यहाँ नहीं बुलाना चाहिए था "
" गलती सबसे होती है और यह गलती नहीं है क्योंकि चाहे कुछ भी अगर कोई हमारे भाई को कहता है तो उसको पलटकर जवाब देना जरुरी है। "
" तो उस दिन तमने क्यों नहीं दिया जवाब ?"
" क्योंकि मेरी गैरहाजरी उन्हें जवाब देने के लिए काफी होगी। अगर कोई अपना गलत कर रहा है तो उसे रोकना हमारा फर्ज है ,मानना न मानना उसका "
" लेकिन में समय आने पर जवाब दूंगा "
" समय का इंतज़ार तब करना चाहिए अगर आपको पता हो की उस जवाब का आगे कोई असर होगा "
(सर ने मौन रहना पसंद किया लेकिन शर्वरी को यह बर्दाशत नहीं था इसलिए वह तीन दिन पहले जॉब छोड़कर चली गई। जो की वार्षिक पूरा होने वाला था और छुट्टी में कुछ ही दिन रह गए थे इसलिए शर्वरी कोई कोई दिक्क्त नहीं आयी।)
दिन बीतने लगे शर्वरी ने क्लास से सरे रिश्ते धीरे धीरे तोड़ दिए। शर्वरी ने दूसरा काम ढूढ़ना शरू कर दिया था। और इसमें उसे ज्यादा दिक्क्त नहीं आयी क्योंकि उसका डिज़ाइन कोर्स का एक हिस्सा पूरा हो गया और उसके प्रशिक्षक को जब पता चला की शर्वरी काम की तलाश में है उन्होंने जॉब ढूंढ कर दी। शर्वरी के स्वभाव की वजह से उसे किसीने मना करना चाहा ही नहीं लेकिन दो जगह में से एक ने मना किया क्योंकि बेशक शर्वरी का स्वभाव अच्छा था लेकिन इस field काम का अनुभव नहीं था। उसने दूसरी जगह जाने की सोची जहा उसकी बहन भी जाया करती थी लेकिन उसकी बहन ने कहा वहां तू मिलके आ लेकिन काम के लिए हां मत करना। और शर्वरी उसकी वजह भी समज गई। लेकिन शर्वरी को वजह बनाकर उसकी बहन के साथ काम करने वाली दूसरी लड़की भी वहा से निकल गई। जो की इस field में अभी शर्वरी आयी ही थी इसलिए उसकी बहन के कहने पर दूसरी लड़की ने कहा में भी तुजे जॉब ढूंढ दूंगी लेकिन शर्वरी की बुरी आदत ने उसे मना कर दिया इसलिए उसने मुँह पर ना बोलने के बजाये बात को टाल दिया।
दूसरी लड़की ने शर्वरी से लिफ्ट मांगी और शर्वरी मना नहीं कर पाई। जो की शर्वरी को क्लास जाने के लिए देरी हो रही थी फिर भी उस लड़की के अति जोर देने की वजह से शर्वरी उसे company देने के लिए उसकी नई ऑफिस पर साथ में गई। यहाँ से कहानी का दूसरा हिस्सा शरू होता है। जल्द ही मिलेंगे...
Hope you got the great stuff to read...next part will come soon...please comment your thoughts...
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I can't words,
ReplyDeleteBovv j mast story che
I really like i